श्री शनि चालीसा – शनि दोष से  शीघ्र निवारण हेतु Shri Shani Chalisa 2021

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Shri Shani Chalisa – कहते है जिसके अगर एक बार शनि लग जाये या  किसी की शनि की दशा बिगड़ जाये तो उसको बर्बाद  होने से कोई नहीं बचा सकता इसलिए शनि को खुश रखना बहुत जरुरी है |

लोग शनि भगवान को खुश करने के लिए तरह तरह के उपाय करते रहते है ऐसे ही शनि दोष निवारण के लिए हर शनिवार “श्री शनि चालीसा” का पाठ  करते है |

आइये जानते है श्री शनिदेव चालीसा का पाठ कैसे करते है और शनि की उपासना  क्यों और कैसे करे –

Shri Shani Chalisa-आखिर कौन है “शनि देव”? क्या है शनि देव का परिचय है?

Shri Shani Chalisa
Shri Shani Chalisa

शनिदेव का परिचय –

श्री शनिदेव का स्वभाव    बहुत ही  गंभीर , त्यागी , तपस्वी , हठी , और क्रोधी स्वाभाव  है और  रंग कृष्ण – वर्ण ( सांवला  ) है |

इनके परिवार के में –  भगवान सूर्य  शनि देव के पिता है और इनकी माता का नाम छाया ( सुवर्णा ) है|  ये   क्षत्रिये जाती से है  और इनका  गोत्र कश्यप  है |

यमराज ( धर्मराज )  इनके भाई है और यमुना इनकी बहन है |

काल – भैरव, बुध और  राहु  शनिदेव के प्रिय मित्र है |

शनिदेव की रूचि आध्यात्म , राजनीती और कानून में है और भगवान  शिव और कृष्ण इनके गुरु है|

हनुमानजी इनके आराध्यदेव है |

शनिदेव का कार्य क्षेत्र – न्याय और कर्म

कुम्भ और मकर शनिदेव की प्रिय राशि है |

लोहे का रथ जिसमे गिद्ध नामक पक्षी जूता रहता है शनिदेव का वाहन है |

अनुराधा , पुष्य , उतरा , भाद्रपद शनिदेव के नक्षत्र है |

सरसो का तेल , गुड़ , तिल , उड़द  और काळा रंग का का कपडा और काळा रंग के पदार्थ शनिदेव की प्रिये वस्तुवे है |

नीलम शनिदेव का प्रिये रत्न  है |

लोहा शनिदेव का प्रिये धातु है | शनिदेव दवारा नियंत्रित व्यापर – उद्योग – लोहा – इस्पात , पेट्रोलियम – प्रदार्थ , मशीनरी का निर्माण व मरमत , वाहनों का निर्माण व मरम्मत , परिवहन का कार्य आदि है |

Shri Shani Chalisa- शनि देव के दस नाम क्या क्या है?

शनिदेव को अलग अलग नामो से जाना जाता है और इनके दस नाम है |

शनि देव क दस नाम निम्न है –

  1. पिंगल
  2. कृष्णा
  3. छायानन्दन
  4. वभ्रु
  5. कोणस्थ
  6. रौद्र
  7. दुःखभंजन
  8. सौरी
  9. मन्द
  10. शनि

श्री शनिदेव की उपासना – श्री शनिदेव की उपासना क्यों करनी चाहिए  और कैसे करे?

भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ब्रह्माण्ड में कुल नौ ग्रह और बारह राशिया होती है आइये जानते है इन गृह और राशियों के बारे में  –

ब्रह्माण्ड  में उपस्थित  नौ गृह

क्रमांक ब्रह्माण्ड के नौ गृह
1 सूर्य
2 चन्द्रमा
3 मंगल
4 बुध
5 बृहस्पति
6 शुक्र
7 शनि
8 राहु
9 केतु

इन सभी नौ ग्रहो की गति , प्रकर्ति , गुण- धर्म  और प्रभाव सब अलग अलग होते है |

बारह राशिया कौन- कौन सी होती है?

भारतीय ज्योतिष शाश्त्र के अनुसार बारह राशिया होती है और हम सभी इन्ही बारह राशियों से अपना राशिफल ज्ञात करते है | यह बारह रशिया निम्न है –

क्रमांक बारहा रशिया
1 मेष
2 वृष
3 मिथुन
4 कर्क
5 सिंह
6 कन्या
7 तुला
8 व्रश्चिक
9 धनु
10 मकर
11 कुम्भ
12 मीन

सभी गृह इन्ही 12 राशियों में भर्मण करते रहते  है | इन सभी ग्रहो की गति और भर्मण में लगने वाला समय अलग अलग होता है |

शनि गृह  बहुत धीमी गति से भर्मण करता है |

श्री शनिदेव का प्रभाव –

शनि गृह इतना प्रभावशाली है कि  जब  यह किसी राशि में विद्यमान होता है तो इसका प्रभाव ढाई वर्ष तक रहता है और इसका प्रभाव इसके अगली और पिछली राशियों पर भी ढाई वर्ष तक  रहता है|

इस प्रकार यह एक राशि को कुल मिलाकर साढ़े सात साल तक प्रभावित करता है इसे ही साढ़ेसाती कहते है |

क्या “शनिदेव” विनाशकारी  और पीड़ाकारी है?

बहुत से लोगो का मानना है कि शनिदेव बहुत अशांत , पीड़ादायक , दुखदायक , कष्टदायक , विनाशकारी , और अमंगलकारी है | जब  यह किसी राशि में प्रवेश करता है तो उसकी सम्पति का नाश होना शुरू हो जाता है |

लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है |

शनि  देवता बहुत ही गंभीर और  कूटनीतिज्ञ है |

जो व्यक्ति जैसे कर्म करता है उसको वैसा ही फल मिलता है शनिदेव उनके अच्छे  बुरे कर्मो के हिसाब से ही फल भी देते है शनिदेव बहुत  न्यायप्रिय देवता है |

“क्षमाकारी शनिदेव “-Shri Shani Chalisa

इंसान गलतिय का पुतला  है और जाने अनजाने में कई बार हम इंसानो से  गलती  हो जाती है और इंसान उस पाप कर्म का भागी बन जाता है |

अगर कोई इंसान गलती करके भी यह मान  लेता कि उसने गलत किया है और उसको इस गलती का पश्चाताप है तो वह व्यक्ति शनिदेव  से गलती की क्षमा याचना  कर सकता  है |

शनिदेव बहुत ही करपालु और जल्दी ही प्रसन्न होने वाले देवता है अगर कोई इंसान अपनी गलती को सुधार ले , अच्छे कर्म करे और शनि देव की उपासना करे तो शनि देव प्रसन्न हो जाते है  और  उसे माफ़ कर देते है |

श्री शनिदेव की उपासना कैसे करे – शनिदेव उपासना पूजन विधि –

शनिदेव पूजन विधि –

प्रातःकाल अपने नित्यकर्म से निर्वेरत होकर साफ़ और सूती वस्त्र धारण कर ले |

एक लकड़ी का पटा ले और उस पर एक साफ़ काला कपडा बिछा ले और इस पर श्री शनिदेव जी प्रतिमा / मूर्ति /shani यन्त्र स्थापित कर ले और स्वयं इनके सामने आसान ग्रहण कर ले |

सरसो के तेल का दीपक जलाये और गुड़ का भोग लगाए |

अगर आपके पास शनिदेव जी प्रतिमा या मूर्ति नहीं है तो पश्चिम दिशा में अपना मुँह करके सरसो के तेल का दीपक जलाकर दीपक में कुछ काले तिल डालकर आप शनिदेव की पूजा कर  सकते है |

और यंहा दिए गए  शनि मन्त्र का जाप करे –

शनि मन्त्र  – Shani Yantra  PDF Download

|| नीलांजन  समाभास रविपुत्र यमाग्रजम 

छाया मार्तण्ड सम्भूत तं नमामि शनैश्चरम ||

उपरोक्क्त मन्त्र के जाप के बाद श्री शनि चालीसा का पाठ करे | यह Shani Yantra  आपको Amazon पर   भी मिल जायेगा | यह शनि यन्त्र आपकी कुंडली से शनि के  अशुभ प्रभावों को कम करेगा |

अगर किसी को साढ़ेसाती का शनि लगा है तो शनि यन्त्र दवारा इस दोष को कम किया जाता है |

और शनिदेव को प्रणाम करे |

श्री शनि चालीसा-Shri Shani Chalisa

श्री  शनि चालीसा

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुबन, मंगल करण कृपाल।
दीनन के दुःख दूर करि, कीजै नाथ निहाल ॥

 

जय जय श्री शनिदेव प्रभु, सुनहु  विनय महाराज |

करहु कृपा हे रवि तनय, राखहु जन की लाज॥

 

॥ चौपाई ॥
जयति जयति शनिदेव दयाला।

करत सदा भक्तन प्रतिपाला ||

 

चारि भुजा तनु श्याम विराजे।
माथे रतन मुकुट छवि छाजै॥

 

परम विशाल मनोहर भाला ।
टेढ़ी दृष्टि भुकुटि विकराला | |

 

कुण्डल  श्रवण चमाचम चमके ।

हिये भाल मुक्तन मणि दमके  ||

 

कर में गदा त्रिशूल कुठारा।

पल विच करें अरिहहिं संहारा ।।

पिंगल कृष्णा छाया नंदन |

वभ्रु कोणस्थ रौद्र दुःख भंजन ||

 

सौरी मन्द शनि देश नामा

भानु पुत्र पूजहि सब कामा ||

 

जापर प्रभु प्रसन्न हुई जाही |

रंकहु राव करे क्षण माहि ||

 

पर्वतहू तृण होई निहारत |

तृणहू को पर्वत करि डारत ||

राज मिलत वन रामहि दीन्हा |

कैकइहूं की मति हरी लीन्हा  ||

 

बनहु में मर्त कपट दिखाई |

मातु जानकी गई चुराई  ||

 

लखनहि शक्ति विकल करि डारा

मची गयो दल में हाहाकारा  ||

 

रावण की गति मति बौराई |

रामचंद्र सों बैर बढ़ाई  ||

दियो कीट करि कंचन लंका |

बजी बजरंग वीर को डंका  ||

 

नृप विक्रम पर जब पगु धारा|

चित्र मयूर निगलि गे हारा  ||

 

हार नौलखा लाग्यो चोरी |

हाथ पैर डरवायो तोरी  ||

 

भारी दशा  निकृष्ट दिखायो |

तेलिहुं घर कोल्हू चलवायो  ||

विनय राग दीपक मह कीन्हो  |

तब प्रसन हवे प्रभु सुख दीन्हो  ||

 

हरिश्चंदरुहें नृप नारि बिकानी  |

आपहुं भरे डॉम घर पानी  ||

 

वैसे नल पर दशा सिरानी  |

भूंजी मीन कूद गई पानी   ||

 

श्री शंकरहि गहौ जब जाई  |

पार्वती को सती कराइ  ||

तनिक बिलोकत ही करि रीसा |

नभ उडी गयो गोरी सूत सीसा ||

 

पांडव पर हवे दशा तुम्हारी |

बची द्रोपदी होती उघारी ||

 

कौरव की भी गति मति मारी |

यूद्ध महाभारत का करि डारि ||

 

रवि मुख मह धरी तत्काला  |

लेकर कूदि परयो पाताला  ||

शेष देव लखि विनती लाई  |

रवि को मुख ते दियो छुड़ाई ||

 

वाहन प्रभु के सात सुजाना ||

गज दिग्गज गर्दर्भ मर्ग स्वाना  ||

 

जम्बक सिंह आदि नख धारी |

सो फल ज्योतिषी कहत पुकारी  ||

 

गज वाहन लक्ष्मी गृह आवें |

हाय ते सुख संपत्ति उपजावे ||

गर्दभ हानि करे बहु काजा |

सिंह सिद्धकर राज समाजा ||

 

जम्बुक बुद्धि नष्ट करि डारे |

मर्ग दे कष्ट प्राण संहारे ||

 

जब आवहि प्रभु स्वान सवारी |

चोरी आदि होय दर भारी ||

 

तैसहिं चारि चरण यह नामा |

स्वर्ण लौह चांदी अरु तांमा ||

लौह चरण पर जब प्रभु आवें |

धन जन सम्पति नष्ट करावें ||

 

समता ताम्र रजत सुभकारी |

स्वर्ण सर्व सुख मंगल भारी ||

 

जो यह शनि चरित्र नित गावे |

कबहुँ न दशा निकृष्ठ सतावै ||

 

अध्भुत नाथ दिखावे लीला |

करे शत्रु के नस बल ढीला ||

जो पंडित सुयोग्य बुलवाई  |

विधिवत शनि गृह शान्ति कराई  ||

 

पीपल जल शनि – दिवस चढ़ावत  |

दीप दान दै बहु सुख पावत  ||

 

कहत राम सुन्दर प्रभु दासा  |

शनि सुमिरत सुख हॉट प्रकाशा  ||

||  जय हो श्री शनि महाराज की  ||

Shri Shani Chalisa – श्री शनि चालीसा – शनि दोष से  शीघ्र निवारण हेतु शनि मन्त्र का जाप करे और संतोष की जिंदगी  जिए |

दोस्तों अगर आपके साथ कोई भी परेशानी हो तो हमें निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जरूर अवगत कराये |

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